गंगटोक : नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) के सिक्किम क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा आज स्थानीय एक होटल में स्टेट क्रेडिट सेमिनार 2026-27 आयोजित हुआ। सेमिनार के उद्घाटन अवसर पर सिक्किम के मुख्य सचिव रवींद्र तेलंग मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उनके साथ वित्त सचिव एमसीपी प्रधान, राज्य कृषि आयुक्त सह सचिव जिग्मे दोरजी भूटिया, आरबीआई कोलकाता के डिप्टी जनरल मैनेजर रॉडनी वैलेंटाइन, एसबीआई कोलकाता के डिप्टी जनरल मैनेजर आलोक जैन, नाबार्ड सिक्किम महा प्रबंधक अजय कुमार सिन्हा और आरबीआई सिक्किम के क्षेत्रीय निदेशक थोतंगम जामंग भी मौजूद थे।
कार्यक्रम में सिक्किम राज्य के लिए नाबार्ड द्वारा तैयार किया गया सालाना क्रेडिट प्लानिंग डॉक्यूमेंट, स्टेट फोकस पेपर 2026-27 जारी किया गया। इसमें कुल क्रेडिट पोटेंशियल 1701.42 करोड़ रुपए होने का अनुमान लगाया गया है, जिसमें खेती और उससे जुड़े कामों के लिए 589.04 करोड़, एमएसएमई के लिए 968.99 करोड़ और दूसरे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए 143.39 करोड़ शामिल हैं।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि तेलंग ने आर्थिक वृद्धि एवं मानव विकास में क्रेडिट की अहम भूमिका पर जोर देते हुए स्टेट फोकस पेपर को आगामी वित्त वर्ष के लिए क्रेडिट आउटले तय करने और राज्य विकास प्राथमिकता को आकार देने वाला एक जरूरी डॉक्यूमेंट बताया। उन्होंने कहा कि जब क्रेडिट ठीक से मिलता है, तो यह समाज के विकास और तरक्की में भरोसे को दिखाता है। इसके उलट, कम क्रेडिट मिलने से आर्थिक प्रेरणा कमजोर होती है और उद्यमिता की उम्मीदें कम होती हैं। ऐसे में, उन्होंने आत्मनिर्भरता और दीर्घावधि आर्थिक स्थिरता के बढ़ावे हेतु कल्याणकारी पहलों को क्रेडिट-आधारित विकास मॉडल से जोड़ने की अहमियत पर जोर दिया।
इसके बाद, मुख्य सचिव ने बैंकों, सरकारी विभागों और दूसरे संस्थानों से मिलकर ऐसा माहौल बनाने को कहा, जहां लोग क्रेडिट पाने, प्रोडक्टिव तरीके से निवेश करने और उधार लेने की लागत से ज्यादा रिटर्न पाने में भरोसा महसूस करें। उन्होंने खेती और उससे जुड़े क्षेत्रों का जिक्र करते हुए अलग-अलग और बदलते तरीकों के बजाय फोकस्ड, क्लस्टर-आधारित विकास जरूरत पर बल दिया।
वहीं, सिक्किम की खास ताकतों का जिक्र करते हुए हुए मुख्य सचिव ने हितधारकों से बड़े बाजार में मुकाबला करने के बजाय, ज्यादा कीमत वाले, खास उत्पाद पर ध्यान देने की अपील की, जहां राज्य को तुलना में फायदा हो। साथ ही, उन्होंने सरकारी संस्थाओं, बैंकों तथा विकास एजेंसियों की सक्विमलित कोशिशों से राज्य की अनछुई क्षमता का पता चलने और ज़्यादा समावेशी आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित होने का भरोसा जताया।
कार्यक्रम में, एसबीआई कोलकाता डीजीएम आलोक जैन ने स्टेट फोकस पेपर को राज्य के विकास का एक वृहद रोडमैप बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र वार क्रेडिट क्षमता देने के साथ वार्षिक क्रेडिट योजना तैयार करने में बैंकों के लिए एक जरूरी दिशा निर्देश का काम करता है। उन्होंने राज्य की अर्थव्यवस्था में खेती को महत्वपूर्ण बताते हुए, बैंकों को बेहतर तरीकों, मूल्य वर्द्धन और बेहतर बाजार संपर्क को बढ़ावा देकर गुजारे लायक खेती से वाणिज्यिक खेती में बदलाव में मदद करने के लिए बढ़ावा दिया। उन्होंने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को ऋण देने और ग्रामीण विकास को मजबूत करने हेतु मिलकर की जाने वाली कोशिशों के महत्व पर भी जोर दिया।
इस दौरान, कृषि आयुक्त जिग्मे दोरजी भूटिया ने स्टेट क्रेडिट सेमिनार को राज्य की विकास संबंधी प्राथमिकताओं के साथ आर्थिक मदद को जोड़ने वाला एक जरूरी प्लेटफॉर्म बताते हुए कहा कि यह खास तौर पर कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों में विकास के लिए एक अहम है। उन्होंने आगे कहा कि क्रेडिट प्लान को असरदार तरीके से लागू करने के लिए हितधारकों के बीच करीबी तालमेल की जरूरत होगी ताकि डॉक्यूमेंट जमीनी स्तर पर ठोस नतीजों में बदल सके।
उन्होंने कृषि क्षेत्र में चल रही कोशिशों पर प्रकाश डाला और मछली पालन तथा पशुपालन जैसे जुड़े हुए क्षेत्रों के साथ खेती के एकीकृत विकास की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक समग्र एवं समावेशी क्रेडिट अप्रोच से राज्य के ज्यादातर किसानों को फायदा होगा। कार्यक्रम को आरबीआई डीजीएम रॉडनी वैलेंटाइन ने भी संबोधित किया। उन्होंने अपने संक्षिप्त भाषण में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में लैंडिंग के महत्व पर जोर दिया और बैंकों से क्षेत्र वार लक्ष्य को प्रभावी तरीके से पाने की दिशा में काम करने को कहा। उन्होंने कम क्रेडिट पेनेट्रेशन वाले जिलों में ज्यादा क्रेडिट आउटरीच को भी बढ़ावा दिया।
इवेंट के दौरान, नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय ने मुख्य सचिव के हाथों अलग-अलग पहलों के तहत सहयोगी संस्थानों को सेंक्शन लेटर और डिस्बर्समेंट सपोर्ट पर भी सौंपे। इनमें सिक्किम स्टेट कोऑपरेटिव बैंक को अपने लेंडिंग पोर्टफोलियो को मजबूत करने के लिए सीधी आर्थिक मदद, नामची जिले के किताम मानपुर जीपीयू और मंगन जिले के नागा जीपीयू में विकास फंड समर्थन, लास्ट-माइल बैंकिंग आउटरीच बढ़ाने हेतु कस्टमर सर्विस पॉइंट और बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट को बढ़ावा देने के लिए अनुमान शामिल रहे। कार्यक्रम में एक तकनीकी सत्र भी हुआ जिसमें विभिन्न मुख्य विकास पहलों पर रोशनी डालते हुए कई प्रस्तुतियां पेश की गई।
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