जनगणना को लेकर जिलास्तरीय बैठक सह प्रशिक्षण आयोजित

यह भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना होगी : Karma R. Bonpo

मंगन : जनगणना 2027 की तैयारियों के तहत आज डीएसी मंगन में जिलास्तरीय बैठक सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों एवं संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर आगामी राष्ट्रीय अभियान की रूपरेखा की समीक्षा की तथा जिला स्तर पर समन्वय को सुदृढ़ करने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

बैठक में जनगणना संचालन निदेशालय के निदेशक कर्मा आर बोनपो (Karma R. Bonpo), डीसी सह प्रधान जनगणना अधिकारी अनंत जैन, एडीसी पेमा वांगचेन नामकार्पा, संयुक्त निदेशक डॉ वी दास गुप्ता, विभिन्न महकमा के एसडीएम, बीडीओ, एसीएफ, राजस्व अधिकारी, जिला नागरिक आपूर्ति अधिकारी पाल्देन एन लाचुंग्पा, मंगन के एमईओ करजोंग भूटिया तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

निदेशक कर्मा आर बोनपो  ने अपने संबोधन में कहा कि 16 वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित हो रही यह जनगणना स्वतंत्रता के बाद की आठवीं जनगणना होगी। उन्होंने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना होगी। पहली बार परिवार सेल्फ एन्यूमरेशन पोर्टल के माध्यम से अपना विवरण ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे, जो तकनीक आधारित सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी, जिसका प्रथम चरण 16 अप्रैल से 15 मई 2026 तक किया जाएगा। सेल्फ एन्यूमरेशन पोर्टल 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक सक्रिय रहेगा। द्वितीय चरण के तहत फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति की गणना कर जनसंख्या का सटीक और व्यापक विवरण तैयार किया जाएगा। निदेशक ने कहा कि जनगणना के आंकड़े योजना निर्माण और प्रशासन की आधारशिला होते हैं। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर कल्याणकारी योजनाएं तैयार की जाती हैं, संसद एवं राज्य विधानसभाओं के निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन होता है तथा आवास, आधारभूत संरचना और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी नीतियां बनाई जाती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सटीक डेटा संसाधनों के न्यायसंगत वितरण और प्रभावी निर्णय लेने को सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि हम केवल जनगणना नहीं कर रहे हैं, बल्कि आने वाले दशक के भारत के विकास की दिशा तय कर रहे हैं।

कानूनी प्रावधानों और जिम्मेदारियों की जानकारी संयुक्त निदेशक डॉ वी दास गुप्ता ने सेंसस एक्ट, 1948 तथा सेंसस रूल्स, 1990 का विस्तृत अवलोकन प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रधान जनगणना अधिकारी, जिला जनगणना अधिकारी, चार्ज अधिकारी, अतिरिक्त चार्ज अधिकारी और शहरी चार्ज अधिकारियों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया। पर्यवेक्षकों और गणनाकारों की नियुक्ति, प्रशिक्षण एवं प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला गया। गणनाकारों को इस अभियान की रीढ़ बताते हुए कहा गया कि वे जमीनी स्तर पर डेटा संग्रहण के लिए प्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी होंगे। अधिनियम और नियमों के अंतर्गत निर्धारित दंड प्रावधानों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि विश्वसनीय और त्रुटिरहित डेटा के लिए सुनियोजित रणनीति आवश्यक है। इसके अंतर्गत योग्य एवं समर्पित कर्मियों की नियुक्ति, व्यापक प्रशिक्षण, प्रधान जनगणना अधिकारी द्वारा निरंतर निगरानी, हाउस लिस्टिंग ब्लॉक  एवं एन्यूमरेशन ब्लॉक का जियो-टैगिंग सहित सटीक सीमांकन, प्रत्येक ब्लॉक का बिना किसी चूक या दोहराव के समुचित कवरेज सुनिश्चित करना शामिल है। डेटा की शुद्धता और अखंडता बनाए रखना इस अभियान की प्राथमिकता बताया गया। अधिकारियों को सीएमएमएस और स्वयं-गणना पोर्टल की कार्यप्रणाली से भी अवगत कराया गया। इन पोर्टलों को सुरक्षित, बहुभाषी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया गया है।

सीएमएमएस पोर्टल के माध्यम से डिजिटल मॉनिटरिंग और रीयल-टाइम निगरानी संभव होगी, जिससे प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि और डेटा गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित किया जा सकेगा। बैठक का समापन सभी अधिकारियों से सामूहिक प्रतिबद्धता और सक्रिय सहभागिता के आह्वान के साथ हुआ। यह स्पष्ट किया गया कि भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना की सफलता जिला स्तर पर समन्वित, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम कार्यप्रणाली पर निर्भर करेगी। सटीक आंकड़ों को आधार बनाकर जनगणना 2027 आने वाले दशक में संतुलित विकास, प्रभावी शासन और राष्ट्रीय प्रगति की ठोस नींव रखेगी।

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