गेजिंग : पश्चिम सिक्किम की सुंदर नगरी गेजिंग स्थित देन्ताम खंड विकास कार्यालय के प्रेक्षागृह में आज साहित्यिक वातावरण से भरपूर एक भव्य समारोह आयोजित हुआ। क्षेत्रीय विधायक सुदेश कुमार सुब्बा की मुख्य आतिथ्यता में मिरमिरे साहित्य मंच, देन्ताम द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में पद्मश्री केदार गुरुंग और साहित्यकार उद्धवगोपाल श्रेष्ठ को अभिनंदन अर्पित किया गया। साथ ही मंच की सामयिक साहित्यिक पत्रिका ‘मिरमिरे’ का लोकार्पण तथा साहित्यिक गोष्ठी भी संपन्न हुई।
कार्यक्रम का आरंभ मंच के अध्यक्ष एवं साहित्यकार छिरिंग पान्जो शेरपा के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज की आत्मा है और मिरमिरे मंच शब्दों के माध्यम से चेतना और संस्कृति के संरक्षण का अभियान निरंतर चला रहा है। उन्होंने कहा कि मिरमिरे केवल पत्रिका नहीं, बल्कि हमारी सृजनशील आत्मा का प्रकाश है, और अतिथियों तथा सर्जकों का हार्दिक स्वागत किया।
मुख्य अतिथि विधायक सुदेश कुमार सुब्बा ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य समाज का दर्पण और मार्गदर्शक दोनों है तथा साहित्यकार राष्ट्र के मौन कर्मयोगी होते हैं। उन्होंने ऐसे रचनात्मक प्रयासों को राज्य स्तर पर भी प्रोत्साहन देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की और इस प्रकार के साहित्यिक कार्यक्रम स्कूलों में आयोजित कर विद्यार्थियों को साहित्य की ओर प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने पद्मश्री केदार गुरुङ और उद्धवगोपाल श्रेष्ठ जैसे व्यक्तित्वों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने नेपाली भाषा और साहित्य को समृद्ध बनाया है।
पद्मश्री केदार गुरुंग ने सम्मान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्य साधना धैर्य, समर्पण और संस्कार की यात्रा है। उन्होंने भावुकता से कहा कि सृजन आत्मा की आवाज़ है, जिसे समाज को सुनने का अवसर देना चाहिए। इसी प्रकार उद्धवगोपाल श्रेष्ठ ने कहा कि साहित्य पीढ़ियों के बीच सेतु का कार्य करता है और युवा रचनाकारों को निरंतर लेखन के लिए प्रेरित किया।
साहित्यिक गोष्ठी में साहित्यकार जीआर खुलाल प्रेरणा, माधव भण्डारी, सुकु एलजी और विनोद छेत्री ने अपनी रचनाओं का पाठ कर सभागार को भावनात्मक और चिंतनशील वातावरण से भर दिया। शब्दों की अभिव्यक्ति ने कभी देशप्रेम जगाया तो कभी सामाजिक यथार्थ को उजागर किया।
कार्यक्रम के विशेष क्षण में मंच के पूर्व अध्यक्ष तारमित लेप्चा को भी सम्मानित किया गया तथा मुख्य अतिथि को स्मृति-चिह्न प्रदान किया गया। ‘मिरमिरे’ पत्रिका के लोकार्पण के साथ उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने नई सृजनात्मक यात्रा के आरंभ का अनुभव किया। इस प्रकार मिरमिरे साहित्य मंच द्वारा आयोजित इस समारोह ने साहित्यिक जगत में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार किया।
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