गोरखाओं को अपने पैरों पर खड़ा होना होगा : अजय एडवर्ड्स

दार्जिलिंग : इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट (आईजीजेएफ) के मुख्य संयोजक अजय एडवर्ड्स (Ajoy Edwards) ने कहा है कि अब गोरखाओं को हमेशा इस्तेमाल किए जाने की प्रवृत्ति खत्म कर अपने पैरों पर खड़ा होना होगा। मंगलवार को पुल बिजनबाड़ी में आयोजित पार्टी समर्थक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि नेपालीभाषी गोरखाओं के इतिहास की उपेक्षा हुई है और विभिन्न शक्तियों ने उन्हें लगातार इस्तेमाल किया है।

सभा में बोलते हुए एडवर्ड्स ने बिजनबाड़ी क्षेत्र की सड़कों की दयनीय स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गांवों तक राशन और पानी पहुंचाने में भी कठिनाई हो रही है। पार्टी सत्ता में न होने के बावजूद लगातार काम कर रही है, यह उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद पहाड़ के नगर निकाय और जीटीए के चुनाव होंगे तथा दार्जिलिंग पहाड़ की समस्याओं का समाधान उनकी पार्टी के पास है।

उन्होंने भूटान में नेपालीभाषियों पर हुए दमन का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि भूटान आर्मी के पूर्व सैनिक बहादुर गुरुंग को नेपाली के प्रति सहानुभूति दिखाने के आरोप में 35 वर्षों तक कैद में रखा गया और हाल ही में उनका निधन हो गया। एडवर्ड्स ने कहा कि उन्होंने भूटान के राजा को पत्र लिखकर सहानुभूति और न्याय की मांग की है तथा बताया कि पिछले 35-40 वर्षों से कई नेपालीभाषी भूटान की जेलों में हैं, जिनके प्रति सहानुभूति दिखाने की अपील भी की गई है।

उन्होंने कहा कि ब्रिटिश काल में गोरखाओं को खोज-खोजकर सेना में भर्ती किया गया, यह नहीं देखा गया कि कौन कहां है, मरा या जिंदा है; उन्हें वेतन भी पूरा नहीं दिया गया। गोरखाओं ने दुनिया के कई देशों में खून बहाया और बलिदान दिया, लेकिन वास्तविकता में उनके रहने के स्थान का कोई ठोस समाधान नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि जब पूर्वोत्तर राज्यों से भी गोरखाओं को निकाला जाने लगा, तब सुभाष घिसिंग ने 1986 में गोरखालैंड राज्य की मांग पर आंदोलन शुरू किया।

एडवर्ड्स ने कहा, सुभाष घिसिंग द्वारा अलग राज्य गोरखालैंड की मांग पर आंदोलन शुरू किए 40 साल से अधिक हो चुके हैं, लेकिन हम इसे एक इंच भी आगे नहीं बढ़ा पाए हैं। आज भी हमें शक की नजर से देखा जाता है। उन्होंने कहा कि अंग्रेज भले ही पहाड़ों से चले गए हों, लेकिन चाय बागानों में अब भी औपनिवेशिक शासन जैसी स्थिति बनी हुई है। चाय बागानों में वर्तमान में केवल 250 रुपये मजदूरी को श्रम शोषण बताते हुए उन्होंने भाजपा से निराशा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में 394 विधायकों में केवल 3 गोरखा हैं और वहां गोरखाओं के पक्ष में बोलने वाला कोई और विधायक नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा के सत्ता में आने से भी गोरखा शोषण नहीं रुकेगा और स्वावलंबन की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने स्वयं प्रयास कर राजू बिष्ट को सांसद बनाया था और कहा, मुझे भी लगा था कि भाजपा गोरखाओं के लिए कुछ करेगी, लेकिन यहां तो बड़ी मछली छोटी मछली को खाने जैसा ही हुआ। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों में गोरखाओं की उपस्थिति बेहद कम है। गोरखाओं के अधिकार और हित पाने में संख्या भी भूमिका निभाती है, लेकिन उनकी संख्या कम है। साथ ही उन्होंने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा कि बंगाल में भाजपा या कोई भी पार्टी सत्ता में आए, उनकी विचारधारा वही रहेगी और गोरखाओं का शोषण नहीं रुकेगा।

उसी विज्ञप्ति के अनुसार, आज की सभा में विभिन्न दलों के 50 से अधिक परिवारों ने आईजीजेएफ को समर्थन दिया। संयोजक एडवर्ड्स ने नए समर्थकों का खादा पहनाकर स्वागत किया।

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