भाजपा गठबंधन दलों के नेता चाहें तो चुटकी में लागू हो सकती है छठी अनुसूची : भानु लामा

दार्जिलिंग : गोरखा राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा सुवासवादी (गोरामुमो-एस) के मूल संयोजक भानु लामा ने कहा कि यदि दार्जिलिंग पहाड़ के भाजपा गठबंधन दलों के नेता छठी अनुसूची का मुद्दा केंद्र के समक्ष उठाएं तो यह ‘चुटकी बजाते ही’ पारित हो सकता है। कुछ महीने पहले गठित इस पार्टी ने छठी अनुसूची के प्रचार पर जोर दिया है। पत्रकारों से बातचीत में लामा ने स्पष्ट किया कि पार्टी गठन का मुख्य उद्देश्य दार्जिलिंग पहाड़ की सुरक्षा और छठी अनुसूची प्राप्त करना है। उन्होंने दावा किया कि छठी अनुसूची ही हमारी मिट्टी, जमीन और पहचान की पूरी तरह रक्षा कर सकती है।

लामा ने बताया कि राज्य और केंद्र सरकार को छठी अनुसूची के महत्व की याद दिलाने के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार हो चुके हैं और जल्द ही कोलकाता व दिल्ली दौरे की योजना बनेगी। उन्होंने कहा कि भले ही राज्य सरकार विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर केंद्र भेज चुकी है, फिर भी सांसदों से मुलाकात जरूरी है। दिल्ली यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्रियों, सत्तापक्ष और विपक्षी दलों के नेताओं से चर्चा की जाएगी।

छठी अनुसूची से संबंधित विधेयक संसद में पेश होने के बावजूद पहाड़ में हुए विरोध के कारण संसदीय समिति को भेजे जाने की याद दिलाते हुए लामा ने कहा कि समिति की अध्यक्ष सुषमा स्वराज ने सभी पक्षों को सुनकर सकारात्मक रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंपी थी। उन्होंने दावा किया कि यदि भाजपा गठबंधन के बिमल गुरुंग, मन घीसिंग, दावा पाख्रिन सहित अन्य नेताओं ने यह मुद्दा उठाया तो केंद्रीय मंत्रिपरिषद इसे पारित कर राष्ट्रपति की मंजूरी से छठी अनुसूची लागू हो जाएगी। दार्जिलिंग पहाड़ की प्रमुख समस्याओं में मिट्टी का स्वामित्व और गोरखा पहचान बताते हुए लामा ने कहा कि जैसे 1935 के अधिनियम ने भूमि की रक्षा की थी, वैसे ही छठी अनुसूची भाषा, संस्कृति, रीति-रिवाज और गोरखा पहचान की रक्षा करेगी। उन्होंने कहा, कारखाने और उद्योग शासन पर निर्भर रहते हैं, लेकिन अगर भूमि सुरक्षित हो तो सब अपने आप समृद्ध हो जाते हैं।

लामा ने आरोप लगाया कि 2007 में दार्जिलिंग के ‘12 मीरजाफरों’ ने छठी अनुसूची के खिलाफ जनता में भ्रम फैलाकर पहाड़ को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा कि इनमें डॉक्टर, वकील और आईएएस जैसे उच्च शिक्षित लोग भी शामिल थे, जिन्हें छठी अनुसूची का महत्व पता होते हुए भी उन्होंने सुवास घिसिङ के साथ व्यक्तिगत अहंकार के कारण इसका विरोध किया। इससे पहाड़ ने एक ऐतिहासिक अवसर गंवा दिया। उनके इस बयान से स्थानीय राजनीति में नई बहस तेज हो गई है।

लामा ने दावा किया कि छठी अनुसूची लागू होने से बेरोजगारी और आर्थिक मंदी जैसी समस्याएं अपने आप हल हो जाएंगी और इसे उन्होंने ‘राज्य के भीतर राज्य’ के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि इसमें राज्य या केंद्र के कानून नहीं चलते, बल्कि अपने कानून बनते हैं और राज्य पर निर्भरता नहीं रहती। उन्होंने कहा कि गोरामुमो-एस पार्टी केवल समस्याएं नहीं, समाधान भी प्रस्तुत करेगी और दार्जिलिंग पहाड़ को विकास के शिखर पर पहुंचाने के लिए बाहरी धन की नहीं, बल्कि आंतरिक संसाधनों की ही पर्याप्तता है।

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