मछलियों का अवैध आयात रोकने के लिए प्रवर्तन गतिविधियां तेज

पाकिम : मछलियों का अवैध आयात रोकने, बिक्री विनियमित करने और जिले में नदी संरक्षण को बढ़ावा देने हेतु जिला मत्स्य विभाग ने जनवरी महीने में प्रवर्तन और संरक्षण गतिविधियों को तेज किया है। इसके तहत, सिक्किम के मुख्य प्रवेश द्वार रंगपो चेक पोस्ट में मछली आयात की निगरानी, खपत का आकलन और आयातित मछली की गुणवत्ता जांच की जा रही है।

जिला मत्स्य विभाग के अनुसार, समय-समय पर विभाग के अधिकारियों द्वारा रात के समय मछली ले जाने वाले वाहनों की औचक जांच में बिना घोषित मछली के कार्टून और जीवित थाई मांगुर के अवैध आयात का पता चला है। सिक्किम में थाई मांगुर (क्लेरियस गैरीपिनस), प्रतिबंधित मछली प्रजाति है। सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार सिक्किम समेत पूरे भारत में इसके आयात, बिक्री और पालन पर प्रतिबंध है। मछली का अवैध आयात न केवल संभावित सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है बल्कि राज्य के राजस्व का नुकसान भी होता है।

इसके अलावा, विभाग द्वारा लाइसेंसिंग, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानदंडों के अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु रंगपो, माझीटार, आईबीएम, सिंगताम और आसपास के क्षेत्रों में भी मछली विक्रेताओं की दुकानों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान, वैध एनओसी के बिना काम करने वाले विक्रेताओं को अपने लाइसेंस नियमित करने का निर्देश दिया गया। पिछली चेतावनियों के बावजूद, बेची जा रही प्रतिबंधित मांगुर मछली को जब्त कर लिया गया। साथ ही, विक्रेताओं को भविष्य में उल्लंघन के खिलाफ सख्त चेतावनी दी गई और उन्हें उचित स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन, बर्फ लगाने और स्वच्छता प्रथाओं के बारे में सलाह दी गई।

विभाग की ओर से बताया गया, यह देखा गया है कि अक्सर ग्राहकों द्वारा जीवित मांगुर मछली दुकानों से खरीदी जाती है। हालांकि, मांगुर जैसी विशेष रूप से आक्रामक प्रजातियों को नदी में छोड़ने से उसकी जैव पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा होता है और स्थानीय मछलियों की आबादी को नुकसान होता है। इसे देखते हुए, जन जागरुकता पर जोर दिये जाने के साथ ही एक स्थायी और पर्यावरण अनुकूल विकल्प के रूप में मछली किसानों और मछली कियोस्क ने कतला और भित्ति जैसी स्वदेशी प्रजातियों को औपचारिक रूप से छोड़ने के लिए उपलब्ध कराया है।

विभाग ने आगे बताया कि सिक्किम में नदी संरक्षण बहुत जरूरी है, क्योंकि बिना सोचे-समझे और गैर-कानूनी मछली पकडऩे के तरीकों, जैसे यूपीएस/इलेक्ट्रिक डिवाइस का इस्तेमाल, डायनामाइटिंग, जहर देना और बिना रोक-टोक के खनन से स्थानीय मछलियों की आबादी कम हो गई है और पानी के पारिस्थितिकी तंत्र खराब हो गए हैं। इसी सिलसिले में, पेदोंग ब्लॉक के मत्स्य एवं पर्यावरण सुरक्षा समिति के साथ मिलकर रंगपो, रेशी खोला, रोराथांग, 5 माइल और कुमरेक में नदी गश्त की गई। बिना लाइसेंस के गैर-कानूनी मछली पकड़ने और गिल नेटिंग के मामले पकड़े गए और उन पर कार्रवाई की गई।

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