पारंपरिक पशुपालन को व्यवसायिक रूप में अपनाएं युवा : डॉ घतानी

सोरेंग : दरामदिन समष्टि अंतर्गत गैरी गांव तिक्पुर में सोमवार को दूध संग्रह केंद्र तथा 500 लीटर क्षमता वाले मिल्क कूलर केंद्र का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस केंद्र का उद्घाटन सिक्ताम-तिक्पुर ग्राम पंचायत इकाई के पंचायत सभापति वीरमान सुब्बा ने किया और इसे स्थानीय दुग्ध उत्पादक किसानों को समर्पित किया।

गैरी गांव तिक्पुर दूध उत्पादन सहकारी समिति लिमिटेड से जुड़े दुग्ध उत्पादकों के लिए इस नवनिर्मित मिल्क कूलर केंद्र का निर्माण सिक्किम मिल्क यूनियन द्वारा राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम के तहत किया गया है। इस केंद्र से दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ किसानों को बेहतर विपणन सुविधा मिलेगी। सिक्किम सहकारी दुग्ध उत्पादन संघ लिमिटेड (सिक्किम मिल्क यूनियन) के तत्वावधान में तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम के तहत राज्यभर में दुग्ध उत्पादकों के लिए जागरुकता कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण दूध उत्पादन, स्वच्छता के अभ्यास और प्रशिक्षण प्रदान करना है।

इसी क्रम में गैरी गांव तिक्पुर में भी जागरुकता कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में पंचायत सभापति वीर मान सुब्बा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उनके साथ सिक्किम मिल्क यूनियन के प्रबंध निदेशक डॉ टीबी घतानी, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर एनटी लेप्चा, डीआर शर्मा और दिनेश चंद्र दहाल, प्रबंधक (पीएनआई) डॉ जीआर गुरुंग, फील्ड इंचार्ज जेपी गुरुंग, सागर सुब्बा और एसटी लेप्चा, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में दुग्ध उत्पादक किसान उपस्थित थे।

अपने संबोधन में प्रबंध निदेशक डॉ टीबी घतानी ने बताया कि सिक्किम मिल्क यूनियन की स्थापना वर्ष 1980 में हुई थी। वर्तमान में यूनियन से लगभग 18 हजार किसान जुड़े हुए हैं और प्रतिदिन 60 से 65 हजार लीटर दूध का संग्रह किया जाता है। उन्होंने बताया कि यूनियन का वार्षिक कारोबार लगभग 150 करोड़ रुपये का है, जिससे किसानों की आय और जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हो रहा है। डॉ घतानी ने कहा कि सिक्किम मिल्क यूनियन किसानों की सहकारिता और सहयोग से संचालित होती है, इसलिए किसानों को इसे अपनी संस्था मानकर स्वामित्व की भावना विकसित करनी चाहिए। उन्होंने जागरुकता कार्यक्रम में युवाओं की बड़ी भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए युवाओं से पारंपरिक पशुपालन को व्यवसायिक रूप में अपनाने की अपील की।

उन्होंने किसानों से अपनी निजी भूमि को बंजर न छोड़ने और प्रोटीनयुक्त घास लगाने का आह्वान किया। साथ ही बताया कि भविष्य में यूनियन द्वारा 15 प्रतिशत से अधिक प्रोटीन वाली घास के पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से घास और पराली उपलब्ध कराने की योजना भी प्रस्तावित है। डॉ घतानी ने स्पष्ट किया कि यूनियन के विपणन में कोई समस्या नहीं है, आवश्यकता केवल अधिक से अधिक गुणवत्तापूर्ण दूध उत्पादन की है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा दुग्ध उत्पादकों को प्रति लीटर 8 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने पशु आहार, गोशाला प्रबंधन, गायों के साथ व्यवहार और जैविक पशु आहार निर्देशिका की विस्तृत जानकारी दी।

जागरुकता कार्यक्रम का संचालन फील्ड इंचार्ज जेपी गुरुंग ने किया। इस अवसर पर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर एनटी लेप्चा, डॉ जीआर गुरुंग और पंचायत सभापति वीर मान सुब्बा ने भी अपने विचार रखे। फील्ड इंचार्ज एसटी लेप्चा ने स्वागत भाषण और सागर लेप्चा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादक सुकवीर लेप्चा तथा नवनिर्मित मिल्क कूलर केंद्र के भूमि दाता डॉ डिकी शेरपा को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।

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