दार्जिलिंग : चाय श्रमिकों को वर्षों से राज्य और केंद्र सरकार द्वारा ठगे जाने का आरोप लगाते हुए हमारे हिल तराई डुआर्स चाय श्रमिक संघ ने शनिवार को दार्जिलिंग के चौक बाजार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पोस्टर लगाए।
श्रमिक संघ के केंद्रीय कार्यकर्ता जतन राई के अनुसार, पोस्टरों में चाय श्रमिकों द्वारा झेली जा रही आर्थिक और सामाजिक समस्याओं को उजागर किया गया है। उन्होंने असंतोष जताते हुए कहा कि वर्ष 2017 में राज्य सरकार ने चाय श्रमिकों के न्यूनतम पारिश्रमिक तय करने के लिए एक सलाहकार समिति का गठन किया था, लेकिन अब तक इसकी अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
आगामी 5 जनवरी को केंद्रीय श्रम मंत्री के दौरे का उल्लेख करते हुए राई ने कहा कि चाय श्रमिकों को दौरे या भाषण नहीं, बल्कि ठोस निर्णय चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यूनतम मजदूरी अधिनियम लागू किया जाए, क्योंकि सरकारी आश्वासनों से श्रमिकों का पेट नहीं भरता। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य और केंद्र सरकार पूंजीपतियों के साथ मिलकर चाय श्रमिकों को उनके संवैधानिक अधिकारों और न्याय से वंचित कर रही हैं। न्यूनतम पारिश्रमिक का मुद्दा किसी राजनीतिक या भौगोलिक विषय से जुड़ा नहीं, बल्कि श्रमिकों के पसीने की कीमत से संबंधित है।
जतन राई ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार कोलकाता उच्च न्यायालय के निर्देशों की भी अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने कई महीने पहले ही छह महीने के भीतर न्यूनतम पारिश्रमिक के मुद्दे का समाधान करने का आदेश दिया था, लेकिन सरकार ने इसे लागू नहीं किया।
अंत में, राई ने जनप्रतिनिधियों, सांसदों और विधायकों से इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख सार्वजनिक करने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र दोनों सरकारों से वे असंतुष्ट हैं और श्रमिकों से संबंधित कई रिपोर्ट और समितियों की सिफारिशों के बावजूद अब तक न्यूनतम मजदूरी लागू नहीं की गई है, जो बेहद दुखद है।
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