गोरखा समुदाय का भाजपा सरकार पर विश्वास नहीं रहा : अमर लामा

दार्जिलिंग : जोरबंगला–सुकेपोखरी खंड अंतर्गत रघुबीर बस्ती से धनबीर होते हुए सुनुवार बस्ती तक 5.04 किलोमीटर सड़क निर्माण के शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (भागोप्रमो) के महासचिव अमर लामा ने वार्ताकार के संदर्भ में दावा किया कि गोरखा समुदाय का भाजपा सरकार पर विश्वास नहीं रहा।

पश्चिम बंगाल ग्रामीण विकास विभाग, दार्जिलिंग डिवीजन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में भागोप्रमो के महासचिव अमर लामा मुख्य अतिथि थे। अपने संबोधन में लामा ने जोर देकर कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार पर गोरखे भरोसा नहीं कर सकते। उन्होंने स्मरण कराया कि गोरखा समुदाय की 11 जातियों को कानूनी रूप से जनजाति दर्जा देने का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ, जबकि असम की 6 जातियों को चुपचाप जनजाति सूची में शामिल कर लिया गया, न कोई प्रचार, न कोई विवाद।

उन्होंने कहा, जो उन्हें पसंद होते हैं, उन्हें चुपचाप दे देते हैं, पर गोरखों को (11 जातियों को) जनजाति दर्जा देने की बात लंबे समय तक करने के बाद भी नहीं दी गई। लामा ने हाल ही में घोषित वार्ताकार नियुक्ति की आलोचना करते हुए इसे सौदा होने से पहले सूची तैयार करने वाला व्यक्ति कहा और व्यंग्य के रूप में “सौदा” शब्द का कई बार प्रयोग किया। उन्होंने दार्जिलिंग में पहले हुए राजनीतिक घटनाक्रमों, वार्ताकारों की भूमिका और दलों की स्थिति पर कटाक्ष किया।

बिना नाम लिए उन्होंने कहा कि दार्जिलिंग के एक भाई (भाजपा विधायक) ने दिल्ली में पहले कहा था कि गोरखों के लिए कुछ अच्छा पक रहा है, लेकिन अब केवल वार्ताकार की नियुक्ति ही हुई है। उन्होंने कहा कि वे भाजपा पर विश्वास नहीं कर सकते और यदि जरूरत पड़ी तो राजनीति छोड़ने को तैयार हैं, पर भाजपा पर भरोसा नहीं करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि भाजपा 2026 के चुनाव को ध्यान में रखकर कोई चुनावी मुद्दा पेश कर सकती है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार यह भ्रम फैला रही है कि उसके कारण लोगों को राशन मिला है, जबकि भारत में राशन व्यवस्था पंडित नेहरू के समय से शुरू हुई थी और मनमोहन सिंह सरकार के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिनियम पारित होने के बाद मुफ्त राशन की व्यवस्था शुरू हुई। उन्होंने कहा, चावल भाजपा की दया से नहीं, बल्कि राइट टू फूड एक्ट से मिला है।

लामा ने चेतावनी दी कि जनता चावल पाकर वोट देने की मानसिकता में न जाए। साथ ही कहा कि यदि भाजपा चाहे तो बड़ा काम कर सकती है, पर वह गोरखों के मुद्दे पर ऐसा करने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने कहा कि वार्ताकार को भ्रमित करने के लिए पहाड़ के कई दल अभी से रिहर्सल में लगे हैं, कोई छठा अनुसूची, कोई गोरखालैंड, कोई यूटी, कोई एकीकरण की बात कर रहा है। उन्होंने वार्ताकार और दलों की स्थिति पर खूब कटाक्ष किए।

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग ने एसआईआर फॉर्म जमा करने की मियाद 11 दिसंबर तक बढ़ाई है और लोगों से समय पर फॉर्म जमा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि 11 दिसंबर के बाद पहली मतदाता सूची जारी होगी और जिनका नाम छूट जाएगा, उसकी सुनवाई होगी। सुनवाई में किसी परेशानी की स्थिति में भागोप्रमो के जानकार सहायता करेंगे।

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